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विश्व की प्रमुख जल धाराएं कौन-कौन सी हैं?


 महासागरीय जलधाराएं:-एक निश्चिचित दिशा में बहुत  अधिक दूरी तक महासागरीय जल की एक विशाल जल राशि के प्रवाह को महासागरीय जलधारा कहते हैंंl धारा दो प्रकार की होती है गर्म जलधारा और ठंडी जल धारा//गर्म जलधारा:-निम्न अक्षांशों में उष्ण कटिबंध से उच्च समशीतोष्णण और उपद्ध्रवीय कटीबंध की ओर से बहने वाली जल धाराओं को गर्म जलधारा कहते हैं l यह प्रायः भूमध्य रेखा से ध्रुव की ओर चलती है l इनके जल का तापमान मार्ग में आने वाले जल के तापमान से अधिक होता है अतः यह धाराएं जिन क्षेत्रोंरों में चलती हैं वहां का तापमान बढ़ा देती हैं l ठंडी जलधारा:-उच्चअक्षांश से निम्न अक्षां0 की ओर बहने वाली जलधारा को ठंडी जलधारा कहते हैंl  यह प्रायः ध्रुरुव से भूमध्ययय रेखा की ओर चलती हैंं l इनके जल का तापमान रास्ते में आने वाle जल के तापमान से कम होता है अतः यह धाराएं जिन क्षेत्रों में चलती हैं वहां तापमान घटा देती हैं l नोट उत्तरी गोलार्धध की धाराएं अपनी दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्धध की जल धाराएं अपनी बाईं ओर प्रवाहित होती हैं यह कोरिओलिस बल के प्रभाव से होता है l

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भारतीय संविधान के भाग

 

भारतीय अर्थव्यवस्था,भारतीय अर्थव्यवस्था का इतिहास PDF,Indian Economy

    भारतीय अर्थव्यवस्था   का   इति‍हास ऐति‍हासि‍क रूप से भारत एक बहुत वि‍कसि‍त आर्थिक व्‍यवस्‍था थी जि‍सके वि‍श्‍व के अन्‍य भागों के साथ मजबूत व्‍यापारि‍क संबंध थे । औपनि‍वेशि‍क युग (  1773-1947 )  के दौरान ब्रि‍टि‍श भारत से सस्‍ती दरों पर कच्‍ची सामग्री खरीदा करते थे और तैयार माल भारतीय बाजारों में सामान्‍य मूल्‍य से कहीं अधि‍क उच्‍चतर कीमत पर बेचा जाता था जि‍सके परि‍णामस्‍वरूप स्रोतों का द्धि‍मार्गी ह्रास होता था । इस अवधि‍ के दौरान वि‍श्‍व की आय में भारत का हि‍स्‍सा  1700  ए डी के  22.3  प्रति‍शत से गि‍रकर  1952  में  3.8  प्रति‍शत रह गया ।  1947  में भारत के स्‍वतंत्रता प्राप्‍ति‍ के पश्‍चात अर्थव्‍यवस्‍था की पुननि‍र्माण प्रक्रि‍या प्रारंभ हुई । इस उद्देश्‍य से वि‍भि‍न्‍न नीति‍यॉं और योजनाऍं बनाई गयीं और पंचवर्षीय योजनाओं के माध्‍यम से कार्यान्‍वि‍त की गयी ।                                    ...

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र, अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र कहाँ स्थित है?,भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र की स्थापना किसने की?

 भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति का गठन 1962 में प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ विक्रम साराभाई की [ भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक]  अध्यक्षता में किया गया, जिसने परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कार्य करना प्रारंभ किया, भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति का पुनर्गठन कर के 15 अगस्त 1969 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन  ISRO की स्थापना की गई ,भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए अंतरिक्ष आयोग और अंतरिक्ष विभाग का 1972 में गठन किया गया तथा इसरो  को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया, वस्तुतः भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत नवंबर 1963 में तिरुअनंतपुरम स्थित सेंट मैरी मैगडेलीन चर्च के एक कमरे में हुई थी 1 नवंबर 1963 को देश का पहला साउंडिंग रॉकेट नाईस ए पास [ अमेरिकी निर्मिती ] को थुम्बा भूमध्य रेखीय TERLS  रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र से प्रक्षेपित किया गया |