Skip to main content

कमलप्रीत कौर,Tokyo Olympics में कमलप्रीत कौर

 


डिस्कस थ्रो फाइनल में छठे स्थान पर रहीं कमलप्रीत कौर
, इतिहास रचने से चूकीं                

टोक्यो ओलंपिक के 11वें दिन भारत को डिस्कस थ्रो में निराशा मिली है. कमलप्रीत कौर फाइनल में छठे स्थान पर रही हैं. उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 63.70 मीटर का रहा. हालांकि हॉकी से भारत के लिए अच्छी खबर है. महिला हॉकी टीम ने इतिहास रचा है. रानी रामपाल की इस टीम ने क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से हरा दिया है. इसी के साथ उसने पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में जगह बनाई है. वह छठे स्थान पर आ गई हैं. कमलप्रीत ने पहले प्रयास में 61.62 मीटर का थ्रो किया था. दूसरे प्रयास में उनका थ्रो लीगल नहीं था. बता दें कि फाइनल में 12 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं और मेडल की रेस में बने रहने के लिए कमलप्रीत का टॉप-8 में बने रहना जरूरी है , कमलप्रीत पंजाब में मुख़्तसर साहब ज़िले के एक छोटे से गाँव आती हैं और बकौल कमलप्रीत जब उन्होंने खेलना शुरु किया तो वहाँ खेल के नाम कुछ ख़ास नहीं था.

पूछते पाछते वो बादल गाँव के स्पोर्ट्स सेंटर पहुँचीं जहाँ से उन्होंने खेलना शुरू किया. अच्छी कद काठी वाली कमलप्रीत ने डिस्कस में हाथ आज़माया और सफलता भी मिलने लगी.

कमलप्रीत को इस बात का मलाल है कि करियर के शुरुआती सालों में गाँव में ठीक से मार्गदर्शन मिला होता तो वो टोक्यो नहीं रियो ओलंपिक में दावेदार होतीं . कमलप्रीत कहती हैं कि गाँव में जैसा माहौल था उसके कारण माँ-बाप भी यही चाहते थे कि बेटी कुछ पढ़ लिख जाए और शादी हो जाए, लेकिन कमलप्रीत अपनी बात पर अड़ी रहीं और परिवार को जल्द ही मना लिया.

परिवार के समर्थन से जो हिम्मत मिली और कमलप्रीत ने जो फ़ैसला लिया था, वो पूरी तरह उस पर खरी उतरीं और 2019 में उन्होंने डिस्कस थ्रो में कई साल पुराना नेश्नल रिकॉर्ड तोड़ा. खेती-किसानी की वजह से माँ-बाप कमलप्रीत के साथ नहीं जा पाते थे और न ही सफ़र के लिए फ़्लाइट की टिकट दे पाते थे, लेकिन आगे बढ़ने के लिए कमलप्रीत का हौसला ही काफ़ी था.

इस साल उन्होंने फ़ेडरेशन कप में 65.06 मीटर का थ्रो डाला था और कुछ दिन बाद इसी साल 66.59 मीटर का. 65 मीटर को पार करने वाली वो पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं.

कमल कहती हैं कि शुरुआती दौर में वो ट्रेनिंग तो करती थीं, लेकिन खेल के दूसरे पहलुओं के बारे में उन्हें अंदाज़ा नहीं था जैसे सही डाइट और खाना.

"गाँव में यही समझते थे कि सब्ज़ी रोटी खाना अच्छी डाइट है, लेकिन ये गाइडेंस तो बाद में मिली कि न्यूट्रीशन का मतलब क्या होता है . फिर मैंने डाइट पर ध्यान देना शुरू किया.."

पिछले दो साल से लगातार कमलप्रीत ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया है जो ओलंपिक में नज़र भी आ रहा है |                                                                 दोस्तों ये पोस्ट आपको कैसी लगी सुझाव जरुर दें धन्यवाद ..अमर पंडित की कलम से......

 

 

 

 

 

Comments

JHATPATSIKHO said…
thans for olympic updation...
Amar pandit said…
achha pradasan raha.....

Popular posts from this blog

भारतीय संविधान के भाग

 

मुग़ल वंश,akabar the great,मुग़ल साम्राज्य,मुगल राजवंश

  1. Q: मुग़ल वंश का संस्थापक कौन था ? [SSC 1998]   1.   बाबर   2.   हुमायूँ   3.   जहाँगीर   4.   उरामशेख मिर्जा   Ans:- बाबर   2. Q: बाबर का जन्म कब हुआ था ? [SSC 2007]   1.   1483   2.   1484   3.   1482   4.   1485   Ans:- 1483   3. Q: बाबर के पिता का नाम क्या था ?   1.   मोहम्मद गौरी   2.   इब्राहिम लोदी   3.   अकबर   4.   उमरशेख मिर्जा   Ans:- उमरशेख मिर्जा   4. Q: बाबर के पिता उमरशेख मिर्जा कौन से राज्य के शाशक थे ? [SSS 2002 , RRB ASM 2005]   1.   आफगानिस्तान   2.   फरगाना   3.   दुबई   4.   कजाकिस्तान   Ans:- फरगाना   5. Q: बाबर फरगाना के गद्दी पर कब बैठा था ? [SSC 2002 , 2002]   1.   8 June 1494   2.   6 July 1493   3.   8 June 1494 ...

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र, अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र कहाँ स्थित है?,भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र की स्थापना किसने की?

 भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति का गठन 1962 में प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ विक्रम साराभाई की [ भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक]  अध्यक्षता में किया गया, जिसने परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कार्य करना प्रारंभ किया, भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति का पुनर्गठन कर के 15 अगस्त 1969 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन  ISRO की स्थापना की गई ,भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए अंतरिक्ष आयोग और अंतरिक्ष विभाग का 1972 में गठन किया गया तथा इसरो  को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया, वस्तुतः भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत नवंबर 1963 में तिरुअनंतपुरम स्थित सेंट मैरी मैगडेलीन चर्च के एक कमरे में हुई थी 1 नवंबर 1963 को देश का पहला साउंडिंग रॉकेट नाईस ए पास [ अमेरिकी निर्मिती ] को थुम्बा भूमध्य रेखीय TERLS  रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र से प्रक्षेपित किया गया |